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भावना को कैसे नियंत्रित करें.

दोस्तों मानवीय भावना का सम्बन्ध मन की संवेदना से है. मानव द्वारा जो भी क्रियाये की जाती है उसमे भावना का बहुत बड़ा योगदान होता है. भावनाये सकारात्मक एवं नकारात्मक हो सकती  है. मानव जीवन भावना से नहीं चलता है. जीवन को चलाने के लिये कुछ जरूरी साधनों की आवश्यकता पड़ती  है. मानव की मूल आवश्यकता रोटी कपड़ा मकान है. अधिकांश मानव अपनी पूरी जिन्दगी रोटी कपड़ा मकान को प्राप्त करने में ही लगा देते है. पूँजीवादी व्यवस्था में  संसाधनों का वितरण बहुत ही असमान होता है. कल्याणकारी कार्यक्रम पूँजीवादी व्यवस्था की देन है. 

अति संवेदना मानव की भावना से ही जुड़ा होता है. अति संवेदना मानव का बहुत नुकसान करती है. इसलिये अति संवेदनशीलता से बचना चाहिये. 

भावनाये हवा के प्रचंड वेग के समान होती है. भावना पर नियंत्रण करके ही इंसान अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है. नकारात्मक भावना मानव का विकास बाधित करती है. हमें इस वात का भी ध्यान रखना चाहिये की भावना को दबाने से मानव के मानसिक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है. 

भावना क्या है —-भावना एक मानसिक स्थिति होती है, जो धरती के सभी जीवों में पायी जाती है. 
यह भावना ही होती है जो इंसान से हत्या तक करा देती है. जब किसी देश की भावनाये उबलने लगती है तो दो देशों में युद्ध भी हो जाता है. हम सभी को भावना में कभी नहीं बहना चाहिये क्योंकि इससे मानवीय मूल्यों का नुकसान होता है. 
जीवन में मानव के रूप में भावनाये जब भी नकारात्मक आये उसे विवेक द्वारा नियंत्रित करना चाहिये. कभी कभी कुछ तत्वों द्वारा भावना को भड़काकर उसका अनुचित इस्तेमाल किया जाता है. सामूहिक भावना को बेहतरीन कानून से नियंत्रित करना चाहिये. भावनाये चाहे व्यक्ति गत हो या सामूहिक उस पर नियंत्रण होना जरूरी है, नहीं तो इससे समाज का नुकसान होता है. 
भावना सकारात्मक हो प्रगतिशील हो, उसे स्वीकार करें. नकारात्मक विचार, भावना का त्याग करें. जब भी भावनाये खुद पर हाबी हो उसे रोके, इसी में सबका हित है. 
दोस्तों कमेंटऔर शेयर जरूर करें. थैंक्स. 
Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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