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Behave and society.

Behave and society. ———-जीवन सदैव गतिशील रहता हैं. जीवन के अंत तक मानव का समाजीकरण होता रहता हैं. जीवन को जानने के लिये व्यवहार को समझना बहुत आवश्यक हैं. मानव का जीवन कमजोरियों के साथ साथ चलता हैं. दुनिया के हर समाज में व्यवहार को बहुत महत्व दिया गया हैं. जीवन में व्यवहार करने के तरीके मानव को बहुत प्रभावित करते हैं.

एक बेहतरीन रिश्ता आप के व्यवहार से कमजोर भी हो सकता हैं, मजबूत भी हो सकता हैं, और समाप्त भी हो सकता हैं चाहे पारिवारिक जीवन हो या सार्वजनिक जीवन मानव का व्यवहार ही उसे अच्छा या बुरे का प्रमाण देता हैं.

मानव समाज में मानव के कुछ कमजोर पक्ष भी होते हैं. मानव की दुर्बलताओं में सुधार करके, समाज में बेहतर नागरिकों का निर्माण किया जा सकता हैं. व्यवहार से ही मानव के रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं. जीवन में यह महत्वपूर्ण हैं कि हम व्यवहार कैसे करते हैं. मानव किसी समाज में ही रहता हैं. जिसमें मानव को परिवार, बच्चों एवं समाज के सदस्यों के साथ जीवन को आगे बढ़ाने के लिये कुछ नियमों एवं परम्पराओं का पालन करना पड़ता हैं.

व्यवहार को आधुनिक विज्ञान ने भी स्वीकार किया हैं. कुछ प्रेमी प्रेमिका जीवन में एक साथ नहीं मिल पाते हैं तो मिलकर जहर खाकर, या ट्रेन के आगे कूदकर जान दे देते हैं. कई लोग तो टुकड़े टुकड़े हो जाते हैं.

इसी धरती पर हम यह भी देखते हैं कि हर भौतिक संसाधन से पूर्ण होते हुये भी अपने प्रेम के रिश्ते को एक बेहतर एहसास नहीं करा पाते हैं. जीवन में एक साथ रहने का अवसर खो देते हैं.

पाया तो यहाँ तक जाता हैं कि पति पत्नी बनकर भी आपसी रिश्तों में इतनी कड़ुवाहट आ जाती हैं कि वह लोग एक साथ नहीं रह पाते हैं. अपना जीवन अलग अलग जीते हैं या फिर तलाक हो जाता हैं. इस पोस्ट को लिखने का मेरी सोच यही हैं कि दुनिया के हर कोने में व्यवहार ही हैं जिससे रिश्ते बनते हैं, जिससे रिश्ते बिगड़ जाते हैं.

दुनिया के हर समाज में मानव संबंधों से एक अपेक्षा पायी जाती हैं. हम घर में रहते हैं. घर का हर सदस्य एक सामान्य व्यवहार की अपेक्षा करता हैं. हम स्कूल में पढ़ते हैं प्राथमिक स्तर से लेकर पीएचडी तक हमारे सभी सहपाठी एक सामान्य एवं रचनात्मक व्यवहार की अपेक्षा करते हैं. हम किसी नौकरी में हो चाहे यह निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र हो हमारे सहकर्मी एक बेहतर व्यवहार की अपेक्षा करते हैं.

हम मेडिकल सेवा ले तब भी, हम कहीं पर्यटन करने जाय तब भी इस व्यवस्था से जुड़े लोग एक बेहतर व्यवहार की उम्मीद करते हैं. इंसान को दूसरे मानव द्वारा किये गये व्यवहार से बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं. व्यवहार के तरीको का सटीक भविष्य वाणी करना संभव नहीं हैं. केवल इसका अनुमान लगाया जा सकता हैं. यह प्रेमी प्रेमिका द्वारा एक दूसरे के साथ किये गये व्यवहार का ही परिणाम हैं कि दोनों एक दूसरे के लिये अपनी जान भी दे देते हैं. दुनिया के किसी समाज वैज्ञानिक द्वारा यह वैज्ञानिक तथ्य नहीं खोजा जा सका हैं कि ऐसा क्यों होता हैं.

आधुनिक जीवन में व्यवहार का सही तथ्य जानना बहुत आवश्यक हैं. यूरोप और अमेरिका में व्यवहार शास्त्र एक पेपर ही होता हैं जिसमें पास होना अनिवार्य हैं. किसी भी व्यवस्था में हम सामान्य रहे, सामान्य जो नियम हैं उसका पालन करें. पूर्व धारणाओं को जो आप के विकास में नुकसान दायक हो उसको तुरन्त छोड़े. एक रचनात्मक सोच के साथ जीवन को स्वीकार करके, जीवन में आगे बढ़े.

धन्यवाद.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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