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Change and society.

Change and society ———यह धरती कैसे बनी इस पर विचारकों में मतभेद है. वैज्ञानिक विचारधारा का मत अलग है. धार्मिक विचारधारा का मत अलग है. विज्ञान मानता है कि रसायनिक क्रियाओं के विकास से जीवन की उत्पति हुई. वहीं धर्म ऐसा नहीं मानता है. दुनिया के हर धर्म में इस संसार के उत्पति के कारण अलग अलग बताये है.

इस धरती पर परिवर्तन एक सामान्य नियम के तहत होता है. हम सब जानते है कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है. इससे जड़ जगत या चेतन जगत कोई बच नहीं सकता है. यदि हम जीव जगत की बात करें तो इस धरती पर जीव, परिवर्तन के नियमों को अनदेखा नहीं कर सकता है. सामाजिक संरचना में परिवर्तन बहुत महत्वपूर्ण होता है. आज समस्त संसार में विमान, पोत, खतरनाक हथियार, गगन चुम्भी इमारतें, फैशन टेक्नोलॉजी, लेटेस्ट मेडिकल टेक्नोलॉजी, आधुनिक सड़के, डिजाइनदार घर, ये सब इस धरती पर हुये भौतिक परिवर्तन के लक्षण है.

अभी 300साल पहले धन कमाने के भी अवसर सीमित थे. पर आज 2019 में पूरे धरती पर रोजगार के अनेक अवसरों का जन्म हुआ. जो समाज के विकास के लिये विकास का इंजन साबित हुआ. सवाल यह है कि एक सामान्य इंसान दुनिया के इन परिवर्तनों से कैसे तालमेल बनाकर जीवन में आगे बढ़े. दुनिया का कोई भी समाज हो एक आम आदमी ही परिवर्तन का वाहक होता है. चाहे वह श्रमिक हो या फिर वैज्ञानिक? परिवर्तन यदि सकारात्मक हो तो उसका विरोध नहीं करना चाहिये. परिवर्तन यदि नकारात्मक हो तो जिस देश के आप नागरिक है उस देश के कानून के अनुसार विरोध करें. प्रश्न यह है कि उस देश में यदि सैनिक शासन हो या फिर राजशाही हो तो वहां अनुचित परम्परा एवं खराब कानून या दमन का का विरोध कैसे करें? दुनिया में बहुत से महापुरुष है जैसे वाशिंगटन, गाँधी, नेशनल मंडेला, के विचारों से प्रेरणा ले. रचनात्मक विरोध जारी रखें.

इस संसार में हर क्षण परिवर्तन हो रहा है. मानव का मन भौतिक आधार पर भी प्रभावित होता है. भौतिक परिस्थिति मानव के मनोवृतियों को बदलती रहती है. भूख, प्यास, सेक्स, पूरे दुनिया के मानव में नेचर के नियमों के अनुसार पाया जाता है. इस धरती पर जो भी परिवर्तन हो रहे है उनसे ताल मेल बना कर आगे बढ़े. यही एक बेहतर विकल्प गुणवत्ता पूर्ण जीवन के लिये हो सकता है. पहले खुद को बदले. खुद को देश एवं समाज से जोड़े. परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्व को जाने. दुनिया का कोई समाज हो, वह बहुत पिछड़ा हो. वहां भी एक व्यवस्था पायी जाती है. व्यवस्था के अंदर परिवर्तन लाने की जरूरत है. आप जिस भी समाज के अंग हो वहां यदि कुछ अवैज्ञानिक है, अन्धविश्वास है, मानवीय मूल्यों के खिलाफ कोई परम्परा है उसका विरोध करें. वह भी रचनात्मक नजरिये से. संसार के किसी भी व्यवस्था को मानव ने ही बदला है. भविष्य में भी मानव ही अपनी भूमिका निभाएगा. जड़ जगत का परिवर्तन मानव के नियमों से अलग होता है.

हम सब को संसार के शानदार भविष्य के लिये मिल जुल कर काम करना होगा.

धन्यवाद..

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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