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Food and society

Food and society. ——-भोजन जीवन का बहुत महत्वपूर्ण अंग है. जीवन में जीव भोजन से ही ऊर्जा प्राप्त करते है. यदि संतुलित भोजन मानव को ना मिले तो मानव कुपोषण का शिकार हो जायेगा. इस धरती पर बहुत सारे ऊर्जा के स्रोत है. पूरी दुनिया में इतने व्यंजन है कि हम उसको गिन भी नहीं पाते है. आज जब सारा संसार एक वौश्विक गांव बन गया है. दुनिया का लगभग हर खाद्य पदार्थ हर देश में मवजूद है. हमें क्या खाना है यह हमें ही निर्णय करना होता है.

सामान्य तौर पर यह देखा जाता है. मानव अपने रूचि के भोज्य पदार्थ का सेवन अधिक करता है. आधुनिक जीवन शैली में बहुत कुछ ऐसा भी है जो स्वास्थ्य के लिये नुकसान दायक है. हमें इनसे बचना होगा. हम सब वहीं सेवन करें जो उचित हो. दुनिया के जीवन शैली में बहुत तेजी से परिवर्तन हो रहा है. आज हम इन परिवर्तन को अस्वीकार नहीं कर सकते है.

हम जो आवश्यक हो उसका निर्माण करें. जो आवश्यक हो उसका उपयोग करें. भोजन को खराब होने से बचाये. क्योंकि संसाधन इस धरती का है. जर्मनी में कुछ भारतीय पत्रकारों को इसलिये जुर्माना देना पड़ा क्योंकि वे खाना अधिक मंगा लिये थे और आधा ही खाना खाये, शेष खाना छोड़ कर जा रहे थे. रेस्टॉरेंट के प्रबंधक ने कहा कि यह जो खाना आप ने छोड़ा है जर्मन देश का संसाधन है आप 250डालर जमा करें. दरअसल उन भारतीयों को पता नहीं था कि उतना ही मगायें जितना खा सके. भारत के होटल, बरात घर में बहुत भोजन नुकसान होता है अपने देश में भी कुछ ऐसी व्यवस्था होनी चाहिये. हम भारतीयों में एक सोच है कि हम अकेले क्या कर सकते है. हम सब को अपनी सोच बदलनी होंगी. घर परिवार, शादी विवाह, होटल, रेस्ट्रा, हर जगह हमें उचित नियम का पालन करना होगा. आज भारतीय अपने भोजन में मोटे अनाज को कम कर रहे है. हमें अपने भोजन में मोटे अनाज को जगह देनी होंगी क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर बेहतर असर पड़ता है.

संसार के अनेक हिस्सों में लोग मोटे अनाज की तरफ बढ़ रहे है. चूँकि यह पोषण युक्त होता है. शरीर के पाचन क्षमता को मजबूत करता है. आज के समय में अधिकांश भारतीय गेहूँ , पॉलिश युक्त दाल, चावल, का अधिक उपयोग करते है. मोटे अनाज का प्रयोग लगभग बहुत कम हो रहा है. हम सब को इस धारणा में परिवर्तन लाना होगा.

अपने देश का क्षेत्र फल बहुत अधिक नहीं है फिर भी देश के किसान अपनी उत्पादन क्षमता से अनाज की कमी नहीं महसूस होने दे रहे है. हम लोगों को इस बात पर भी विचार करना होगा कि अपने देश के किसान की माली हालत अच्छी नहीं है. किसान पौष्टिक भोजन नहीं ले पा रहा है. जो परिवार के लिये बेहतर हो उसी भोजन को अपने थाली में शामिल करें. हम क्या खा रहे है हमें पता होना चाहिये. जीवन बहुत जटिल है. हम सब एक रास्ता बना लेते है कि सब ठीक है लेकिन वास्तव में कुछ ठीक नहीं होता है. हम नये नये रोग के लपेटे में आ जाते है.

आज पूरी दुनिया में बहुत से फास्टफूड बाजार में उपलब्ध है. हम इनसे दूरी नहीं बना सकते है. सामान्य तौर पर कभी कभी हम ले सकते है. जीवन में इनकी आदत नहीं डालें. यह भोजन भूख को तुरन्त शांत कर देता है. पर शरीर में कई तत्वों जैसे फैट , कोलेस्ट्रॉल आदि की मात्रा बढ़ा देते है. जो जीवन के लिये नुकसान दायक है. हम विवेक द्वारा खुद निश्चित करें कि हमारे लिये ज्यादा जरूरी क्या है.

धन्यवाद

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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