Socialduty

Domestic violence and society.

Domestic violence and society. —–==हिंसा बिहीन समाज इस धरती पर नहीं हो सकता है. यह हो सकता है समाज विशेष में हिंसा कम हो. दुनिया का ऐसा कोई देश नहीं है, जहाँ घरेलू हिंसा नहीं हो रहा है. हम सब को समझना चाहिये कि घरेलू हिंसा का मूलकारण क्या है. किसी भी समाज में हिंसा का एक स्वरूप पाया जाता है.

हिंसा क्या है. किसी को शारीरिक या मानसिक चोट पहुँचाना ही हिंसा है. घरेलू हिंसा का स्वरूप समस्त संसार में एक ही होता है. परिवार के सदस्यों के बीच मारपीट, एक दूसरे को अपमानित करना, मानसिक पीड़ा देना यह सब घरेलू हिंसा है. इस दुनिया में सब के पास उचित पैसा नहीं है. परिवार के सदस्यों को उचित इलाज नहीं दे पाना घरेलू हिंसा नहीं है. परिवार के सदस्यों को किसी रोग को लेकर ताना देना, उनका भरण पोषण नहीं करना घरेलू हिंसा है.

मानव के सम्बन्ध बहुत नाजुक होते है. संसार में रिश्तों को लेकर एक ही नियम पाया जाता है. पत्नी का रोल सारे संसार में एक ही है. दुनिया के सभी दाम्पत्य मिलकर ही जीवन जीते है. यदि मानवीय संवेदना की बात करें तो पूरे धरती पर एक समान पायी जाती है. घरेलू हिंसा से किसी भी रिश्ते का भला नहीं होता है. जीवन जीने का नाम है किस मानव के पास परेशानी नहीं है. सब को घरेलू समस्या से जूझ कर जीवन में आगे बढ़ना होता है.

हर मानव के कुछ निर्णय जीवन के लिये गलत साबित होते है. कुछ एक निर्णय से घबराकर इंसान जीना तो नहीं छोड़ देता है. मानव जीवन का गोल ही है जीवन में आगे बढ़ते रहना. संसार का हर धर्मशास्त्र मानव को रचनात्मक कार्य करने की प्रेरणा देता है. यूरोप और अमेरिका में घरेलू हिंसा है लेकिन बहुत कुछ इससे जुड़े मामले कड़ी कानूनी प्रक्रिया से नियंत्रित होती है. जो दुनिया के लिये एक सुखद संकेत है. भारत में तो दहेज के लिये बहू को बहुत आसानी से मार दिया जाता है.

भारत में घरेलू हिंसा बहुत दुःखदायी है कानून तो है पर कानून लागू करने वाले संस्था बहुत भरष्ट है. बहुत अपराधी बिना दंड पाये छूट जाते है. भारत में घरेलू हिंसा के लिये एक मजबूत कानून की जरूरत है. जीवन व्यक्ति का कैसा होगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी परवरिश किस तरह से होती है. जीवन में घटने वाली घटना इंसान को काफी प्रभावित करती है. समाज के रचनात्मक विकास के लिये हिंसा को दूर करना जरूरी है.

1–हम सब हिंसा के स्वरूप को जाने.

2–घरेलू हिंसा से बचें.

3–जीवन में अपने परिवार का सम्मान करें.

4–हम सब लोकतान्त्रिक तरीके से फैसला ले.

5–हार को जीत में बदलने के लिये हर क्षण तैयार रहे.

6–जीवन में नये होने वाले परिवर्तन को स्वीकार करें.

7–यदि अपने साथी से आप की नहीं बन रही है तो उस समय कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं ले.

8–मानव के जीवन को गरिमा से सींचे. स्वछंद जीवन दुःख को साथ लेकर चलता है.

9–हम जिस भी रिश्तों में हो उसका सम्मान करें.

10–जिसके वजूद से जीवन की रूपरेखा है उस चीज को स्वीकार करें.

जब हम तैरना नहीं जानते है, तो उसका लाभ हानि हमें पता होनी चाहिये. जीवन को गंभीरता से स्वीकार करें. दुनियादारी से अपने आप को जोड़े पर वह कोई कार्य आप के लिये नुकसानदायक है जो आप के विकास को रोकती है. दोस्तों यह मेरा निजी विचार है. आप सब जानते है की आप सब के लिये जीवन से जुड़े मुद्दों को लेकर आप सब के सामने आता हूँ. अंतिम मूल्यांकन तो आप को ही करना है. मेरा गोल तो आप सब के बिखरे हुए, टूटे हुये धागों को एक सूत्र में पिरो कर जीवन के कुछ सच से आप सब को जोड़ सकूँ ताकि आप सब का जीवन बेहतर हो.

घरेलू हिंसा भी एक प्रकार का अपराध है. यह पूरे संसार में फैला है यदि कोई पति अपने पत्नी को मारता है तो इसका स्वरूप पूरे संसार एक समान होगा. मै रिश्तों के सम्मान की बात करता हूँ तो इसका अर्थ है हम सब जिस भी रिश्तों से जुड़े हो उसका सम्मान करें. घरेलू हिंसा किसी भी प्रकार का हो उसका विरोध होना चाहिये. ऐसा नहीं है कि समाज में हिंसा नहीं होंगी, होंगी पर हम सब को ध्यान रखना होगा यह कम से कम हो.

हम अपने आप को यदि शिक्षित कहते है तो घरेलू हिंसा का डटकर विरोध करें. मानव की गरिमा का आदर करें. हम अपने जुड़े रिश्तों का सम्मान करें. आधुनिक बदलती दुनिया के सकारात्मक नजरिये को स्वीकार करें. विकास के लिये मिलजुल कर आगे बढ़े.

धन्यवाद.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
http://www.thesocialduty.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *