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How do I make my brain work better—–

How do I make my brain work better—— मानव के ब्रेन की क्षमता कितनी है इस बिंदु पर सटीक जानकारी अभी तक ज्ञात नहीं है. आइंस्टीन ने एक बार कहा था कि मानव अपने ब्रेन का केवल 5% हिस्सा ही उपयोग कर पाता है. काफी सिद्धांत कारों का मानना है कि आइंस्टीन का विचार सत्य है. दोस्तों मेरे विचार से मानव के ब्रेन की संरचना बहुत जटिल है. मानव के ब्रेन की डिजाइन इस प्रकार है कि इसके सॉफ्टवेयर के संबंध में कोई भी वैज्ञानिक केवल अनुमान लगा सकता है. जैसे समुद्र के गहराई में कोई मोती छिपा है उसे आज तक कोई भी खोज नहीं पाया है यह उम्मीद करना कि कोई उसे खोज नहीं पाएगा गलत है ऐसा भी हो सकता है कि कोई व्यक्ति अपने परिश्रम और ज्ञान के बल पर उस मोती को खोज ले. ठीक इसी प्रकार की हम सबको जानकारी मानव के संबंध में है मानव के ब्रेन में बहुत कुछ ऐसी संरचना हैं जिसका कि अभी खोज ही नहीं हो पाया. मानव ब्रेन के अंदर मौजूद संरचना को वैज्ञानिकों देख तो सकते हैं लेकिन इसका कार्य क्या है वैज्ञानिक सटीक आकलन नहीं कर पा रहे.

ब्रेन को वैज्ञानिक तरीके से जाने —-

दोस्तों मैं वैज्ञानिक नहीं हूं मैं एक सामान्य रूप से समाजशास्त्री हूं जो सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात आप सबके सम्मुख रखता हूं. दोस्तों किसी मानव के जीवन में उसकी परवरिश और उसको दी गई शिक्षा बहुत ही आवश्यक पहलू होता है. जो किसी भी मानव का जीवन निर्धारित करता है. अब बात यहां आती है कि दुनिया के अंदर जो हमारा जनजाति समाज है या इन समूहों से जुड़े लोगों का ब्रेन कैसे विकास करता है. इस मुद्दे पर भी दुनिया के विचारक, समाजशास्त्री, मानव शास्त्री, और वैज्ञानिक किसी एक मत पर सहमत नहीं है कि मानव का ब्रेन कैसे काम करता है. दुनिया के अंदर ऐसी भी प्रतिभाओं को देखा गया है कि कुछ प्रतिभाएं खेल में बहुत ही ऊंचाई को प्राप्त करती हैं वह किस समूह से जुड़ी हैं, किस धर्म से जुड़ी हैं, किस देश से जुड़ी हैं, यह बहुत मायने नहीं रखता है. मेरा कहने का अर्थ है केवल इतना ही है कि कोई भी मानव विकास कर सकता है उसे बस अपने आप को रचनात्मक कार्यों से जोड़ना होगा. इस दुनिया में रचनात्मक कार्य क्या है यह समाज विशेष पर निर्भर करता है भारतीय समाज में जो रचनात्मक कार्य होता है हो सकता है दुनिया के किसी कोने में उसे रचनात्मक नहीं माना जाए जैसे भारत के अंदर यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के ऊपर थूक देता है तो इसे बहुत बुरा माना जाता है परंतु ऑस्ट्रेलिया में एक जनजाति ऐसी है कि वह एक दूसरे के ऊपर थूक कर एक दूसरे का स्वागत करते हैं. दुनिया के हर देश में परंपरा और मूल्य अलग-अलग होते हैं परंतु कुछ सार्वभौमिक मूल्य होते हैं जो पूरे संसार में एक समान होते हैं जैसे किसी की बाल्टी चुराना यदि भारत में अनुचित माना जाता है तो ऐसा नहीं कि ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जर्मनी, आस्ट्रेलिया में किसी की बाल्टी चुराना उचित माना जाएगा वहां भी इसे अनुचित ही माना जाएगा इसे ही सार्वभौमिक मूल्य कहते हैं. मानव के ब्रेन के विकास में जलवायु बहुत मुख्य भूमिका अदा करती है. दुनिया के अंदर हम देखें जो मानव कठिन परिस्थितियों में जैसे पहाड़ों या मुश्किल हालात में रहते हैं उनकी परिश्रम करने की क्षमता खास तौर से जो दुनिया के मैदानी भागों में रहते हैं से अधिक होती है. जिसका मूल कारण है वहां का स्थानीय पर्यावरण और भौगोलिक संरचना?

यदि हम आज के दौर की बात करें तो पूरा संसार एक गांव के रूप में तब्दील हो गया है. आधुनिक विश्व में यह दुनिया के लिए बहुत रचनात्मक संकेत है.

ब्रेन का उपयोग कैसे करें —

हम सभी डब्लू सी वाशिंगटन, जॉन एफ कैनेडी, नेशनल मंडेला, और महात्मा गांधी के विषय में जानते हैं. नेशनल मंडेला 28 वर्ष तक सीलन भरी कोठरी में जेल के अंदर रहे. कई बार दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने उनसे यह विनती किया कि आप हमारी शर्तों को मान ले आपको सा सम्मान रिहा कर दिया जाएगा परंतु मंडेला जी ने इस शर्त को स्वीकार नहीं किया अंत में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के जो नियम थे उसको नष्ट किया गया. हर किसी को यह सामान्य तथ्य नजर आ सकता है परंतु यदि हम ध्यान से विचार करें तो पाएंगे कि 28 वर्ष तक जेल के सीलन भरी कोटरी में रहना इतना आसान नहीं होता है यह दुनिया का कोई महामानव ही कर सकता है. यूरोप के कई वैज्ञानिक ने मंडेला जीके इन क्रियाओं का बहुत बड़ा अध्ययन किया परंतु कोई भी तत्व को प्राप्त करने में असफल रहे. भारतवर्ष के अंदर गांधीजी खुद एक उदाहरण है कहा जाता है कि पूरे संसार में ब्रिटिश हुकूमत का कभी सूरज अस्त नहीं होता था लेकिन महात्मा गांधी ने अपने कर्म बल से ब्रिटिश हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, ये सब मानव ब्रेन की क्षमता का समुचित उदाहरण है.

प्यारे दोस्तों हम किस परिवार में पैदा हुये, किस देश में पैदा हुये यह मायने नहीं रखता है. हम केवल अपने कर्म बल से आगे बढ़ने का प्रयास करें, रचनात्मक सोचें, दुनिया कि कोई भी परेशानी आपको झुका नहीं सकती? दोस्तों सहज रहें, सामान्य रहें, अपने परिवार का ख्याल रखें, अपनी शिक्षा पर ध्यान दें, अपनी सेहत पर ध्यान दें, आपके सामने जब कभी भी मुश्किल आए तो आप सोचे कि इस मुश्किल का सबसे मानवीय हल क्या है? किसी भी प्रकार की हिंसा से कभी भी किसी व्यक्ति समाज का भला नहीं हुआ है.

दोस्तों हमारा ब्रेन जो प्रत्यक्ष में देखता है उसी के आधार पर परिस्थितियां बनाकर निर्णय लेता है. यह भी सच है कि कुछ निर्णय मानव के पक्ष में भी जा सकते हैं और कुछ निर्णय उसके विपरीत भी जा सकते हैं. दुनिया के हर समाज में अनुशासन और संस्कार की बात की जाती है. अनुशासन और संस्कार अपने आप में कुछ नहीं है केवल यह एक सीखा हुआ व्यवहार है जो मानव के जीवन को आसान बनाता है. मानव मन में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रवृतियां रहती हैं यह मानव पर निर्भर करता है कि दोनों प्रवृत्तियों में किस प्रवृत्ति को अधिक महत्त्व देता है इसी इसी प्रवृत्ति के आधार पर ही मानव का भविष्य निर्माण होता है. किसी उच्च पद को धारित करने वाला व्यक्ति ही पूर्ण रूप से नैतिक हो यह अपेक्षा नहीं की जा सकती है क्योंकि नैतिकता देश काल और परिस्थिति के अनुसार बदलती रहती है. बहुत कुछ ऐसे नियम है जो भारत में अपराध की श्रेणी में आते हैं परंतु वहीं अमेरिका में सामान्य समझा जाता है. दोस्तों इन तथ्यों के विश्लेषण के बाद मै यह तथ्य अपने विचार से प्रकट कर रहा हूं कि मानव का सॉफ्टवेयर क्या है कैसे काम करता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इसको डिजाइन नहीं किया जा सकता है. यह सच है कि आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बहुत बोलबाला है लेकिन इसके दुष्प्रभाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. इस आधुनिक रोबोट युग में रोबोट डांस कर सकता है, आपको खाना खिला सकता है, आपसे बातें कर सकता है, लेकिन वह एहसास नहीं पैदा कर सकता है जो एक मानव मानव के बीच में होता है. यही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सबसे बड़ी चुनौती है. दोस्तों अपने को देशकाल परिस्थितियों के अनुसार जो रचनात्मक हो उसको स्वीकार करें, जीवन में लगातार बेहतर करने का प्रयास करें. जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मानव जीवन का उद्देश्य क्या है यह अभी तक ज्ञात नहीं है. आइए हम सब मिलकर के ह्यूमन रिसोर्स के विकास में एक बेहतरीन भूमिका अदा करें.

दोस्तों कमेंट लाइक और शेयर जरूर करें आपका बहुत ही भरपूर प्यार हमें मिल रहा है हमारे कई दोस्तों ने मेल करके अपनी समस्याएं व्यक्त की है निकट आने वाले समय में इन बिंदुओं पर मै क्रमिक पोस्ट लेकर आता रहूंगा दोस्तों बहुत-बहुत धन्यवाद.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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