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Industry revolution in world.

Industry revolution in world——- व्यापार का जन्म कैसे हुआ इसका सही अनुमान किसी भी विचारक के पास नहीं है. वैज्ञानिक नजरिया भी सटीक जानकारी अभी तक नहीं दे पाया है. इस विषय पर रिसर्च अभी भी जारी है. 1492ई में ही अमेरिका की खोज होती है. जो दुनिया के लिये एक बहुत बड़ी घटना थी. दुनिया ने इसे बहुत सहजता से स्वीकार किया. आधुनिक दुनिया में बदलाव के स्रोत यूरोप से ही पूरी दुनिया में फैले. जनसंख्या बढ़ी, हर प्रकार से भौतिक एवं अभौतिक परिवर्तन हुये. मानव की आवश्यकता भी बदलती गयी. भौतिक विकास के साथ साथ मानव के अंदर लालच, नफ़रत, धनी बनने का विचार भी आया. आज दुनिया की आबादी लगभग 700करोड़ से अधिक है.मानव की विभिन्न जरूरतों की पूर्ती करने के लिये उद्योगो का जन्म हुआ. आज पूरे संसार में उद्योग आधारित सामाजिक संरचना का विकास हो रहा है.

आधुनिक उद्योगों से तालमेल कैसे बनाये.

मानव जीवन एक यात्रा के रूप में शुरू होता है. गीता में इसका जिक्र है कि इस धरती पर कुछ भी अनावश्यक नहीं है. संसार के हर भौतिक अभौतिक तत्व एवं तथ्यों का महत्व है. हम सब को बस नजरिया बदलने की जरूरत है. जीवन जन्म से मृत्यु तक की एक यात्रा होती है. इससे इस धरती का हर प्राणी जुड़ा हुआ है. मौत से कोई भी जीव बच नहीं सकता है.

आज कारखानों से अनेक प्रकार के प्रदूषण हो रहे है इस धरती पर मानव का जीवन कष्टमय हो गया है. फिर भी उद्योगों को बंद नहीं किया जा सकता है. हम सब को इस धरती पर कल कारखानों के साथ जीना होगा. यह हो सकता है कि हम सब वैज्ञानिक रूप से ऐसी कोई तकनीक विकसित करें जो कारखानों से होने वाले नुकसान को रोक सकें. बहुत से कारखानों में ऐसी तकनीक लग भी गयी है. जहाँ नहीं लगी है वहां हमें शोध करके वातावरण फ्रेंडली तकनीक विकसित करनी होगी. अमेरिका, यूरोप, एशिया, आस्ट्रेलिया, में उद्योगों का विकास बहुत तीव्र गति हो रहा है.

समस्त संसार में मानव की जरूरतों को ध्यान रखकर ही उद्योगों का विकास हुआ. मानव की मूलजरूरत होती है रोटी, कपड़ा, मकान,.. मुद्रा के विकास के साथ साथ मानव की भौतिक वादी विलासिता की जरूरतें बढ़ती गयी. मानव अज्ञानता से ज्ञान की तरफ, कम से अधिक की तरफ, मूर्खता से विद्धता की तरफ, गरीबी से अमीरी की तरफ जाना मानव का स्वाभाविक गुण है. आज 2019 में एक सूझ बूझ और समझदार इंसान के पास हर भौतिक सुबिधा है फिर भी इंसान खुश नहीं है. दरअसल ख़ुशी भौतिक वस्तु से नहीं मानसिक सोच और सकारात्मक विचारों से आती है. उद्योगों का सही विकास देश की वर्तमान समस्या को नष्ट कर सकती है. आज स्टील, इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, सैन्य उद्योग, प्राथमिक क्षेत्र, सेवा, विनिर्माण, जैसे उद्योगों का महत्व बढ़ गया है. आज आधुनिक संसार में हम विकास के नये तत्वों को देख रहे है.

एक सामान्य नागरिक के रूप में हम जिस भी देश के नागरिक है. वहां के विकास को सहजता के साथ स्वीकार करें. उद्योगों को जीवन से जोड़े. आज उद्योग विहीन समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है. यदि कोई भी उद्योग से किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो उसका वैज्ञानिक अध्धयन करें. उससे कोई पर्यावरण की दिक्क़त हो तो उस देश के कानून के अनुसार विरोध करें. अपने देश की सरकार को उस समस्या से अवगत कराये.

प्यारे दोस्तों मेरा कहना है कि इस दुनिया के हर देश में बहुत ऐसे उद्योग है जो नुकसान दायक तत्वों को उत्सर्जित करते है. जिससे मानव एवं वातावरण को हानि पहुँचती है. प्रश्न यह है कि एक आम आदमी क्या करें. मेरे विचार से शांत रहे आपने देश के कानून को जाने. अपनी सरकार को बताये. साथ ही अपने देश की न्यायपालिका को अवगत कराये. दुनिया में बेहतरीन बदलाव सकारात्मक सोच से ही हुआ है. मुझे लगता है कि आप सकारात्मक बदलाव लाने में सफल होंगे. आज हम सब ज्ञान आधारित दुनिया के अंग है. समाज या देश में बदलाव भी इन्हीं तरीको से होगा. दोस्तों आप कमेन्ट और शेयर जरूर करें.

धन्यवाद..

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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