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Responsibility and society.

Responsibility and society —-==जिम्मेदारी कर्तब्य बोध का ज्ञान कराता हैं. इस धरती पर जो जीव मानव के रूप में पैदा हुये हैं उनके साथ कुछ ना कुछ जिम्मेदारी अवश्य रहती हैं. जिम्मेदारी को निभाना व्यक्ति के संवेदना पर निर्भर करता हैं. मानव का कर्तब्य बोध उसे रचनात्मक कार्य करने के लिये प्रेरित करती हैं. वैश्विक सामाजिक संरचना कुछ भी हो. जिम्मेदारी और संवेदना संसार के हर समाज में पाया जाता हैं. हम जिस भी सामाजिक वातावरण में हो उसकी सामान्य आवश्यकता एवं नियमों का ध्यान रखें. दुनिया के बड़े देशों में जैसे यूरोप और अमेरिका में परिवार का कम महत्व हैं लेकिन ऐसा नहीं हैं कि वहां परिवार नहीं हैं. परिवार हैं लेकिन उसकी संरचना दुनिया के अन्य देशों के परिवार से बिल्कुल अलग हैं.

विकसित देशों में परिवार की बहुत आवश्यकता समाज द्वारा पूरी की जाती हैं. मित्रों हम संसार के चाहे जिस देश निवासी हो, अपने नागरिक कर्तब्य का ध्यान रखें. अपने देश के प्रति व्यवहारिक एवं रचनात्मक सोच रखें. आज पूरे संसार की बहुत सी परेशानी इसी विचार से हल हो जायेगी कि हम अपनी जिम्मेदारी बेहतर ढंग से निभाये.

हम जिस भी संबंधों में हो उसका सम्मान करें. अपने रिश्तों को बेहतर बनाने के लिये सदैव तैयार रहे. साधन सपन्न देशों में बढ़ता तलाक अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से नहीं निभाने का उदाहरण हैं.

यह एक सार्वभौमिक सत्य हैं कि यदि पति अपने पत्नी की इच्छाओं का सम्मान करें तो तलाक लगभग नहीं होंगे. व्यावहारिक जीवन में हम अपने अधिकार को तो मजबूत करते हैं पर अपनी जिम्मेदारी से हट जाते हैं.

सकारात्मक एवं नकारात्मक विचार वह नियम हैं जिस पर संसार के सभी मानव का जीवन निर्भर करता हैं. संसार के सभी समस्या का हल इसी विचार में छुपा हैं. 1945 में अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा एवं नागाशाकी पर परमाणु बम गिराना नकारात्मक सोच थी. पर घटना घटने के बाद जापान और खुद अमेरिका ने सकारात्मक विचारधारा स्वीकार किया. यह कहना सही होगा कि अमेरिका ने 1945के बाद जापान के पुनर्निर्माण में बहुत सकारात्मक पहल की. आज जापान विश्व में चोटी के देशों में शामिल हैं. आज जापान की तकनीक विश्व में प्रथम स्थान पर हैं जिसका एक कारण अमेरिका का बेहतरीन सहयोग भी हैं. आज आधुनिक युग में स्वतंत्र विश्लेषण करें तो अमेरिका एवं यूरोप का पूरी दुनिया के लिये दिया गया योगदान अपने आप में काफी सकारात्मक हैं. यही सकारात्मक विचार हैं.

यदि हम दुनिया के किसी परिवार की बात करें यदि परिवार के बड़े परिवार की समस्या को नकारात्मक दिशा देंगे तो परिवार को बिखरने से कोई नहीं रोक सकता हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता हैं कि परिवार भारतीय हैं, आस्टेलियाई है, अमेरिकी है या फिर यूरोपवासी है. यह नियम पूरे संसार पर लागू होता है. हम पूरे संसार में कहीं भी रहे अपने परिवार एवं देश का ख्याल रखें. मानवता का पूर्ण लक्ष्य भी तो यही है कि समस्त विश्व में सामान्य मानवीय भावना को आदर मिले. मानव मात्र के प्रति सम्मान हो. यदि हम सब मिलकर अपने स्तर से इन सामान्य जिम्मेदारियों का वाहन करें. तब आप देखेंगे कि आप का विकास कितना तीव्र गति से हो रहा होगा.

मानव की सोच एवं परिकल्पना अनन्त होती है. मानव के सोच को जिम्मेदारी के सांचे में ढाल कर देश एवं समाज के लिये रचनात्मक क्रियाएं सम्पन्न की जाती है. पूरे संसार में सामान्य मानवीय भावना एक समान होती है. दुनिया के हर कोने में रह रहे मानव को रोटी कपड़ा मकान एवं मनोरंजन की जरूरत होती है. जो नियम इस धरती पर है उनमें सहयोगात्मक एवं सकारात्मक कार्य को बहुत सम्मान प्राप्त है.

बहुत बहुत धन्यबाद.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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