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Life with traditional rule and society.

Life with traditional rule and society ——–

जीवन और परम्परा एक दूसरे से दोनों जुड़े है. मानव जीवन में परम्परा का महत्व है. पूरी दुनिया में परम्परा के प्रति लगाव पाया जाता है. परम्परा को समग्र रूप में समझने की जरूरत है.

परम्परा क्या है ————.  अतीत काल से चली आ रही कुछ विचारधारा एवं भैातिक क्रियाओं की व्यवस्था है. जो मानव जीवन को प्रभावित करती है. देश काल एवं परिस्थितियों के अनुसार अलग अलग  परम्परा की  व्यवस्था पायी  जाती है. बहुत कुछ यूरोप में सामान्य माना जाता है जबकि भारत में वह  बहुत बड़ा जुर्म माना जाता है, जैसे यूरोप में कहीं  भी प्रेमी जोड़े चुंबन ले सकते है यह एक सामान्य बात है. जबकि अपने देश भारत में यह बहुत बड़ा मुद्दा हो जायेगा.

दोस्तों मै परम्परा त्यागने की बात नहीं कर रहा हूँ. मेरा केवल इतना कहना है कि वह परम्परा जो  मानव गरिमा को ठेस पहुंचाने का काम करे उसका त्याग होना चाहिये. यही मानव सम्मान की रूपरेखा है इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है.

विकासशील देशों  में परम्परा हाबी है यह इंसान को स्वतंत्रता पूर्वक सोचने नहीं देती है. लोग मेरा अच्छा है, तेरा ख़राब है इसी में उलझे रहते है. कभी कभी छोटे छोटे संघर्ष बड़े झगड़े का रूप ले लेते है. यही तो अज्ञानता है. मानव जीवन रचनात्मक कार्य करने के लिये मिला है इस बात को हम सब को समझना चाहिये. अनेक सामाजिक कारणों से हम अपने जीवन का लक्ष्य नहीं बना पाते है, जिसके परिणाम स्वरूप हमारा अधिकांश समय नष्ट हो जाता है.

अमेरिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया में सामाजिक संरचना बैज्ञानिक विचारधाराओं पर आधारित है. इसलिये वहां आज के समय में परम्परा का बहुत महत्व नहीं है. वहां यह सोच पायी जाती है कि जो विकृतियाँ मानव का विकास रोके, उसका त्याग कर दिया जाय. यह भी सच है विकसित देशों मेंअनेक  दूसरी समस्या का जन्म हो गया है. जिसका कि वे लोग बड़ी तत्परता से हल खोज रहे है.

विकासशील देशों की बात करे तो यहाँ पर बुनियादी समस्या ही इतना अधिक है कि हम सब नकारात्मक परम्परा को नष्ट करने तक पहुंच ही नहीं पाते है. विकृतियों को नष्ट करने के लिये हमें शिक्षा को बढ़ावा देना होगा. बैज्ञानिक सोच विकसित करनी होंगी. मानवता के लिये काम करना होगा. मानव गरिमा को समझना होगा.

आधुनिक सामाजिक संरचना में वह हमें सब कुछ छोड़ना होगा, जो मानव के विकास में बांधा उतपन्न करता हो. यही समय की मांग है.  आज  अपने देश भारत में दहेज के नाम पर प्रतिदिन सैकड़ो बहनों को मार दिया जाता है. भारत एक मजबूत देश है इसमें दुनिया को शक नहीं है, पर हम सब को अपनी बहनों को इस अनुचित परम्परा से बचाना होगा.
ऐसी देश दुनिया की बहुत सी समस्या है जो परम्परा से जुड़ी है.

इतना तो स्पष्ट है कि यूरोप और अमेरिका में दहेज के लिये किसी महिला की हत्या बहुत कम होती है. ये चीजें  हम अपने देश में भी जन जागरूकता के माध्यम से फैला सकते है.

दुनिया के कई समाजों में अच्छी परम्परा भी है, उनका बैज्ञानिक परीक्षण करके, कोई भी उन्हें स्वीकार कर सकता है. जीवन में आगे बढ़ सकता है. आज भूमंडलीकरण के युग में दुनिया एक गांव के समान हो गयी है. हम सब को बदलती विश्व व्यवस्था के साथ चलना होगा.
दोस्तों कमेन्ट औरशेयर जरूर करे. थैंक्स.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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