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Jivan ko jaane.

Jivan ko jaane——

हम सभी लोग हर दिन आर्थिक उपार्जन में लगे रहते है बिना यह जाने की हम इस जीवन से चाहते क्या है? हम सब जीवन में केवल भागे जा रहे है, भागे जा रहे है.

आज बदलते दौर में यह विचार करना होगा कि हम अपने जीवन से दुनिया को क्या संदेश देना चाहते है. जीवन में हर इंसान के लिये एक गोल होना बहुत जरूरी है उसी गोल के सहारे इंसान को जीवन में आगे बढ़ना चाहिये. हम सब को यह समझना होगा कि खुश रहने के लिये धनी होना आवश्यक नहीं है. जीवन में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिये पैसे की जरूरत पड़ती है. पैसा कमाना सही तरीके से गलत भी नहीं है बस ध्यान वही देना है पैसा हवस नहीं बनना चाहिये.  पैसा जीवन की एक आवश्यकता है, जीवन का लक्ष्य नहीं है. पैसा जब जीवन का लक्ष्य बन जाता हैतो वह इंसान को खोखला कर देता है.

इस दुनिया में हर इंसान की कुछ जरूरत होती है. दोस्तों हमें ध्यान रखना होगा कि यह धरती इंसान के जरूरत को पूरा कर सकती है, उसकी इच्छा को नहीं पूरा कर सकती है. क्योंकि हर मानव की इच्छा असीमित होती है. मानव का जीवन बहुत लम्बा हो उसे ही सफल नहीं माना जाता है. मानव की पहचान उसके रचनात्मक कार्यों द्वारा होती है.

यूरोप और अमेरिका में लोग लोकप्रियता पाने के लिये तरह तरह के कार्य करते रहते है, अपने कार्यों में वह नवीनता की खोज करते है. अपने ही देश भारत को ले, तो पाते है कि 135करोड़ की आबादी है. भारत की धरती पर जन दबाव बहुत अधिक है. इसमें बहुत कुछ जलवायु मुख्य कारक है. जब देश की आबादी यहाँ तक पहुँच चुकी है, अब सोचने का समय नहीं है. इस जन संख्या को देश के विकास में लगाना होगा. हम सब जानते है कि मानव की क्षमता असीमित है. यह ऊर्जा तभी सकारात्मक दिशा में जा पायेगी जब पारदर्शी कोई सटीक योजना का जन्म होगा. बेहतरीन योजना तक पहुंचने के लिये बेहतरीन शोध की जरूरत होगी. इसके लिये वैज्ञानिक विचारधारा को अपनाना होगा. कोई भी देश हो उसकी पहचान उसके नागरिकों से होती है.

भारत जैसे देश में लोग लक्ष्य बिहीन जीवन जीते है. हमें इस धारणा को बदलना होगा. हमें अपने जीवन का एक गोल बनाना होगा. गोल को प्राप्त करने के लिये पूरी ऊर्जा झोकनी होगी. मन को स्थिर करना होगा. एक निश्चित दिशा में अपनी ऊर्जा लगानी होगी. आज कल  के जीवन में काफी दबाव रहता है. हमें जीवन में आने वाले दबाव से निपटने की कला सीखनी होगी. यदि हम ऐसा कर पाते है तो ठीक है. यदि हम दबाव में रहेंगे तो इंसान की ऊर्जा नकारात्मक दिशा में जाने की सम्भवना बढ़ जाती है.

अपनी ऊर्जा को सृजनात्मक कार्यों में लगाये, इससे हम अपने देश एवं समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सुन्दर तरीके से निभा सकते है. यही खुद को पुरस्कार देने का सबसे उचित तरीका होगा.
दोस्तों कमेन्ट और शेयर लाइक जरूर करें. थैंक्स.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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