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Khush kaise rahe.

Khush kaise rahe ——–जीवन में खुश रहना बहुत कठिन हैं. इसके लिये हम सब बहुत प्रयास करते हैं. जीवन में हर इंसान खुश रहना चाहता हैं पर यथार्थ में जीवन में हर इंसान बहुत दुःखी रहता हैं.

खुशी क्या हैं —खुशी एक सोच हैं. एक अनुभूति हैं. एक अवस्था हैं. खुशी कोई वस्तु नहीं हैं. खुशी जीवन का आधार हैं. प्रश्न यह हैं कि इंसान खुश कैसे रहे?

दोस्तों खुशी बाजार में नहीं बिकती हैं, इसके लिये अपनी मानसिक अवस्था को सकारात्मक विचारों से जोड़ना पड़ेगा. हम बहुत सारा अपने लिये कपड़ा खरीद ले, प्रशाधन के वस्तु खरीद ले इससे हमको खुशी नहीं मिलती हैं. व्यवहारिक जीवन में देखते हैं जिनके पास संतान  हैं वह भी दुःखी हैं, जिनके पास नहीं हैं वह भी दुःखी हैं. मानव का काफी जीवन विचारों के इसी रूपरेखा में चला जाता हैं. किसी इंसान के पास धन नहीं हैं वह दुःखी हैं. किसी इंसान के पास धन हैं तो वह अपने धन से दुःखी हैं. यही मानव जीवन का चक्र हैं.

महात्मा बुद्ध ने कहा था यह संसार दुःख मय हैं. व्यक्ति जीवन भर खुशी की तलाश करता रहता हैं पर उसे खुशी नसीब नहीं होती हैं.
दोस्तों यह मेरा निजी विचार हैं कि खुशी एक अवस्था होती हैं जैसे हम कोई कार्य कर रहे हैं पूरा हो गया. खुशी मिलती हैं पर वह अस्थायी होती हैं. ऐसा सोचना कि खुशी मिल जाय हमेशा के लिये यह उचित नहीं हैं.
कभी कभी हम एक गरीब इंसान को देखते हैं वह हमसे ज्यादा खुश दिखायी पड़ता हैं. हमारे पास हर बैभव होते हुए भी हम दुःखी रहते हैं.

ब्रिटेन में एक कहावत हैं कि खुशी रहने के लिये धनी होना आवश्यक नहीं हैं. यह विचार अपने आप में दर्शन के बहुत गहरे रूप को इंगित करता हैं.

हम पढ़े लिखें, घूमे, अपने जीवन में सकारात्मक विचारों का सोच विकसित करें. यदि हम सक्षम हो तो जरुरतमंदो की मदत करें. जीवन का एक गोल बनाये. अपने गोल को प्राप्त करने के लिये अपनी पूरी ऊर्जा लगा दे. अपने परिवार की आवश्यकता का ध्यान रखें.
अपने देश के विकास में तन मन धन से योगदान दे.
दोस्तों खुशी के विचार पर विद्वानों में बड़ा मतभेद हैं. लगभग सभी विचारको की राय अलग अलग हैं. दुनिया के अनेक देशों में अभी इस विन्दु पर शोध जारी हैं.

हम अपना कर्तब्य बेहतर तरीके से निभाए. क्योंकि इंसान का कर्म ही इंसान को ऊंचाई पर ले कर जाता हैं.

प्यारे दोस्तों हमारा  कर्म ही हमारे रास्ते बनाता हैं, जिस पर  हम अपना भावी जीवन तय करते हैं. जब भी हम आगे चले इस बात का ध्यान रखें कि आप के कदम से किसी का कोई नुकसान नहीं हो. मानवीय प्रक्रिया में यह सबसे बेहतर माना जाता हैं.

अगर हम रिश्तों  में हो तो उन रिश्तों को सम्मान के साथ निभाए. कभी कभी रिश्ता टूटने के कारण  भी खुशियों पर बहुत बुरा असर पड़ता हैं.
हम अपनी खुशियों के लिये स्वम जिम्मेदार हैं. इस तथ्य को  हमें समझना होगा.

दोस्तों कमेन्ट और शेयर लाइक जरूर करें. थैंक्स.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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