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Life and Earth——–

धरती कब बनी कैसे बनी इसके विषय में बहुत सटीक जानकारी किसी के पास नहीं हैं ? कहा जाता है कि आज से 4:30 अरब वर्ष पहले धरती की उत्पत्ति हुई। वैज्ञानिक प्रमाणों के द्वारा इसे साबित करने का प्रयास भी किया गया परंतु बहुत ऐसे साक्ष्य अभी भी संदेह के घेरे में मौजूद है। एकमत पर जो सभी विद्वान संतुष्ट नजर आते हैं कि पृथ्वी शुरुआती दौर में एक आग के गोले के समान थी। धीरे-धीरे यह ठंडी हुई और ठंडी होने के क्रम में विभिन्न प्रकार के सागर और महासागर तथा स्थल खण्ड का जन्म हुआ। पृथ्वी की उत्पत्ति के संबंध में धर्म ग्रंथों का अलग विचार हो सकता है लेकिन सभी प्रकार के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद यह तत्व उपस्थित हुआ कि धरती की उत्पत्ति एक खगोलीय घटना है ।जो आज हम सौरमंडल देख रहे हैं यह पूर्व में ऐसा नहीं था क्योंकि सौरमंडल भी कभी आकाशगंगा का एक भाग था।

दुनिया का सबसे बेहतरीन और नायाब तोहफा प्रकृति या भगवान द्वारा मानव को दिया गया । आज यदि हम 2020 की बात करें तो पाते हैं कि तमाम प्रकार के मानव की क्रिया नेचर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह धरती मानव की इच्छा को पूरा नहीं कर सकती ,यह धरती केवल मानव की आवश्यकताओं को ही पूरा कर सकती हैं। अध्ययन के उपरांत यह पाया गया यदि कोई मानव नेचर के विरुद्ध बहुत ही आक्रामक कार्य करता है तो नेचर द्वारा उसे दंडित किया जाता है। हम दुनिया के अंदर किसान हो सकते हैं या विभिन्न प्रकार के किसी नौकरी पेशा में हो सकते हैं। धरती को प्रदूषित करने का हमारे पास कोई अधिकार नहीं है। मेरे ब्लॉक का मुख्य उद्देश्य है कि आप सब की जो समस्याएं हैं उन समस्याओं का वैज्ञानिक परीक्षण करके अपना मत आप लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करू जैसा कि आप जानते हैं हम जिस देश के नागरिक हैं, जिस भी समाज में हम रहते हैं ,समाज की परंपरा ,धर्म ,व्यवस्था तथा कानून के अनुसार इस पृथ्वी का संरक्षण करें ।पूरे सौरमंडल में पृथ्वी ही एकमात्र ग्रह है जहां पर जीवन पाया जाता है अन्य किसी ग्रह पर जैसा कि हम जानते हैं कि जो चार अन्य ग्रह है जैसे बृहस्पति ,अरुण वरुण , शनि गैसीय ग्रह है ।जबकि बुध शुक्र और मंगल सभी ठोस है। आमतौर पर केवल मंगल पर ही रितु परिवर्तन होता है ।यानी मंगल ग्रह पर ही मानव जीवन को विकसित होने की प्रबल संभावना है। ऐसा महसूस किया जाता है कि एलियन का जो कांसेप्ट है। एलियन होने की जो संभावना है वह मंगल ग्रह से ही जुड़ता है।

धरती को स्वच्छ रखें———-

हम धरती पर किसी भी सामाजिक संरचना या व्यवस्था में रहते हो ।हमें कोई अधिकार नहीं है कि इस पृथ्वी को किसी भी तरीके से प्रदूषित करें । आज पूरे संसार में मानव आबादी बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है ।मानव आबादी को रोकने के लिए अनेक प्रकार के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं लेकिन मानव जनसंख्या को रोकने के लिए अनेक प्रयास कभी सफल नहीं हो पाए ।हम सबकी यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि धरती पर कोई भी मानवीय क्रिया ऐसी ना हो ।जिससे धरती पर किसी भी प्रकार का प्रदूषण व्याप्त हो ।हमें एक ऐसी रीति और नीति की व्यवस्था करनी होगी जिससे इस धरती पर प्रदूषण कम से कम हो ।यदि आने वाले भविष्य में प्रदूषण को सही तरीके से नहीं रोका गया तो यह धरती मानव के जीने योग्य नहीं रह जाएगी ।भारत और चीन को इस संबंध में काफी सावधानी बरतनी होगी क्योंकि चीन और भारत के अंदर जनसंख्या निर्बाध गति से लगातार बढ़ती चली जा रही है ?एक सकारात्मक तथा पर्यावरण फ्रेंडली नीति हम सबको बनाना पड़ेगा ।जिससे धरती पर अनावश्यक दबाव को कम किया जा सके। मैं भारत की बात करूं तो मध्य प्रदेश ,राजस्थान ,छत्तीसगढ़ ,झारखंड ,बिहार ,उत्तर प्रदेश, के कुछ इलाकों दिल्ली का दक्षिणी भाग ,आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक ,तथा तमिलनाडु के अनेक हिस्सों में जल संकट एक बड़ी मुसीबत के रूप में हमारे देश के सम्मुख उपस्थित हो चुका है ।हम सबको मिलकर के जल संरक्षण तथा वाटर सेट की नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करना होगा ।प्रश्न यह उठता है कि यह नीति लागू कैसे होगी तो उसके संबंध में जो बहुत स्पष्ट विचार है ।हम सबको अपने घरों में वाटर सेट की प्रक्रिया अपनाना होगा ।हम सबको कृषि में उपयोग होने वाले जल को वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करना होगा ।हम सब को यह भी ध्यान रखना होगा कि विभिन्न प्रकार के नाले और नाली का जल प्रदूषित होकर के विभिन्न प्रकार की नदियों में ना मिले । हमें भी कोशिश करना होगा कि जल का दुरुपयोग कम से कम करें। प्यारे मित्रों ,भाइयों एवं बहनों एक तरीके से यह विचार उतपन्न हो सकता है कि मेरे करने से क्या होगा ।प्यारे मित्रों मैं इस अपने ब्लॉक के माध्यम से कहना चाहता हूं यदि आप एक शुरुआत करते हैं ,यदि आप ऐसा खुद कर पाते हैं। वाटर सेट की नीति अपनाते हैं ।अपने खेतों में कम से कम जल का प्रयोग करते हैं यानी अपने खेतों में सिंचाई करने के लिए जल का वैज्ञानिक तरीके से दोहन करते हैं तथा उर्वरक जो हम प्रयोग करते हैं वह बहुत सीमित या आवश्यकता के अनुसार हो। जैसा कि अभी हम देख पा रहे हैं विभिन्न प्रकार की जो नीतियां हैं सॉइल हेल्थ कार्ड घर आ चुका है ।हम अपनी जमीन की जांच को करा करके आसानी से वैज्ञानिक ढंग से उर्वरक का प्रयोग करें ।शुरुआत यानी एक अच्छी शुरुआत भारत के किसी कोने में या दुनिया के किसी कोने से हो सकती है। मैं एक बात अपने प्यारे मित्रों ,भाइयों ,बहनों से कहना चाहता हूं कि जब अपना देश आजाद हुआ था तो संविधान में अनेक देशों के कानून को या तथ्य को स्वीकार किया गया था ।आज के डेट कि हम बात करें तो आज हमारे तमाम भाई बहन कह सकते हैं कि गलत हुआ ,क्योंकि हमारे संविधान में बार-बार संशोधन करना पड़ता है । प्यारे मित्रों मैं कहना चाहता हूं कि यह संशोधन जो बार-बार हमारे संविधान में हो रहा है यह हमारी कमी का नहीं हमारी जागरूकता का प्रतीक है ,क्योंकि उस समय जब देश आजाद हुआ था यानी मैं 1947 की बात करू तो उन परिस्थितियों में जो बेहतर लगा या उस समय के जो बुद्धिजीवी थे, जो देश के कर्णधार थे, जो देश के नीति निर्माता थे उन लोगों ने महसूस किया कि पूरे संसार के अंदर जो बेहतर चीजें हैं उसको हम एक्सेप्ट करें। उसको स्वीकार करें और उसको देश के कानून के रूप में लागू करें ।उन्होंने ऐसा किया भी है ।यह बहुत बेहतर साबित हुआ और यदि आज के दिन हम बात करें तो हम रचनात्मक रूप से ,सकारात्मक सोच के साथ जो भी व्यवस्था हो , आने वाले समय में यह धरती काफी हद तक प्रदूषण से मुक्त हो जाएगी ।जैसा कि 2013 में अभी देख पा रहे हैं कि ऐसी घटना उत्तराखंड के अंदर घटी,अनेक प्रकार के लोगों को समय से पूर्व भी काल काल्वित होना पड़ा इसका प्रमुख कारण है कि प्रकृति का कुपित हो जाना ।कई हजार लोगों की जानें चली गई कितना संसाधन नष्ट हुआ कितनी परेशानी आई उसका कोई आकलन नहीं किया जा सकता। धरती को बचाना भी एक तरीके से देश भक्ति है ।हमारे देश के नागरिक या भाई बहन जो धरती को प्रदूषित होने से बचाते हैं कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में वह देश भक्त हैं ।देश इन्हीं के ऊपर गर्व करता है फिर भी हम संसार की बात करें तो यूरोप इस मामले में काफी बेहतर साबित हो रहा है लेकिन अभी भी हमें एशिया और अफ्रीका तथा दक्षिण अमेरिका में बेहतर कार्य करना बाकी है।

हम सब को यह बात बहुत आसानी से समझ लेनी चाहिए कि यह धरती रहेगी तभी मानव का जीवन रहेगा और इस धरती पर किसी भी प्रकार का नुकसान होगा तो मानव जीवन प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। प्यारे दोस्तों आप सब से अनुरोध है कि यदि आपकी कोई समस्या हो तो हमारे ईमेल पर कमेंट करें तथा हमारे ब्लॉक पर आ कर के भी अपकी जो भी परेशानी है कमेंट करके जाहिर कर सकते हैं ।आपके हर कमेंट को मेरे द्वारा पढ़ा जाता है आपकी जो भी समस्याएं होंगी मेरे द्वारा आपकी समस्याओं को निदान किये जाने का प्रयास किया जाएगा।

दोस्तों कमेंट लाइक और शेयर जरूर करें तहे दिल से आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद थैंक यू ।

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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9 thoughts on “Life and Earth——–

  1. सर जी वाही मे आप बहुत अच्छा लिखे है

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