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Plastic and society.

Plastic and society—–=

पालीथीन का मानव जीवन में बहुत अनूठा अविष्कार था पर यह आज मानव के जीवन को दुःख दायी बना रहा है. 2050ई तक समुद्र में मछली से ज्यादा प्लास्टिक की संख्या हो जायेगी. मानव के बहुत उपयोगी वस्तु पालीथीन में पैक होकर सुरक्षित रहती है पर आज यही मानव समाज के लिये हानिकारक साबित हुआ है.

सभ्यता के विकास में मानव की आवश्यकता बढ़ती चली गयी. यह धरती मानव के आवश्यकता को पूरा कर सकती है मनुष्य के इच्छा को नहीं. मानव का लालच बढ़ता ही जा रहा है. प्रकृति का दोहन मनमाने तरीके से हो रहा है. आज पूरे संसार में विकास की एक प्रक्रिया चल रही है. हर देश एक दूसरे देश से आगे निकलना चाहता है. पर्यावरण के प्रति कोई भी देश जिम्मेदारी लेने के लिये तैयार नहीं है. बस सभी देशों को केवल विकास चाहिये.

आज पूरे धरती पर बाढ़, गर्मी, सूखा, अम्ल वर्षा, भूकंप आदि बहुत अधिक मात्रा में दिखाई पड़ता है. सब पर्यावरण की ही देन है. पालीथीन धरती के सभी क्षेत्रों में पहुँच रहा है. इसके विषय में एक जो सबसे कष्टकारी बात है वह यह है कि यह 450साल तक धरती पर मौजूद रहेगा. इसको नष्ट करने का उपाय अभी खोजा जाना बाकी है. धरती, वायु, जल, नदी, झील, समुद्र, हर जगह यह पालीथीन प्रदूषण फैला रहा है. अनेक जानवरो के पेट में यह भोजन के माध्यम से पहुँच रहा है. पालतू जानवरो को नुकसान पंहुचा रहा है. दुनिया का हर देश इसके प्रदूषण से परेशान है पर अभी सटीक उपाय वैज्ञानिक नहीं खोज पाये है.

धरती को कैसे स्वच्छ रखें इस बात पर पूरी दुनिया में लगातार चर्चा हो रही है. अभी कोई कारगर उपाय मानव के समक्ष नहीं आया है. पालीथीन के नुकसान को एक आम आदमी भी समझ रहा है. यह एक सत्य है.

हम सब को पालीथीन का कम से कम प्रयोग करना चाहिये. संसार के हर देश की सरकार अपने बल पर इसे समाप्त नहीं कर सकती है. आम नागरिकों को इसमें जन भागीदारी दिखानी होंगी. यह केवल एक देश या किसी समाज विशेष की समस्या नहीं है. यह पूरे दुनिया की समस्या है. इसको सब को मिलकर हल करना होगा.

हम अपने घरों में, यात्रा के दौरान, कपड़ा खरीदते समय, दवा खरीदते समय पालीथीन का कम से कम उपयोग करें. हम तभी स्वस्थ्य रहेंगे जब वातावरण सेहतमंद होगा. आज आधुनिक विश्व तकनीक से चलता है. हम सब को पालीथीन को नष्ट करने का विकल्प खोजना होगा. यह भी सच है कि पालीथीन को 100%समाप्त नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसके उपयोग को कम किया जा सकता है. जीवन में बहुत चीजें है जिससे हम भागते है. हम प्रदूषण से भाग नहीं सकते है यह आने वाली हमारी पीढ़ियों से जुड़ा है.

मेरे देश वासियों हम दुनिया के लिये अपनी जिम्मेदारी समझें. अपने देश को प्रदूषण मुक्त बनाये. दुनिया के लिये धरती को बचाये. भारत वर्ष में धरती को भी माता का दर्जा दिया गया है. दुनिया में समस्त संसार में खुशहाली आये ऐसा भारत के लोगों की सोच है. भारत में बहुत कुछ ऐसा है? जो दुनिया के लिये कर सकता है. भारत ने अपने कदम बढ़ा दिए है जो एक शुभ संकेत है. संसार के सभी देशों को एक साझा सोच पर काम करना होगा तभी संसार का भला होगा.

धन्यवाद.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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