Socialduty

Hardwork and society.

Hardwork and society.

यह धरती जीवन के कई रहस्यों को छुपाये हुए है. इस धरती पर अपने कर्म से जीवन जीना पड़ता है. यहाँ कुछ भी आसान नहीं है. परिश्रम से इस धरती पर आप सब कुछ प्राप्त कर सकते है. यही इस संसार का नियम है. यूँ  तो ये संसार बहुत विशाल है. मानव की क्षमता का आंकलन करना अभी संभव नहीं हो पाया है. इस धरती पर मानव ने आश्चर्य जनक क्षमता का कार्य कर दिखाया है. जो हम सभी मानव के लिये प्रेरणा का आधार है. हम निराशा विहीन समाज की कल्पना नहीं कर सकते है.

जहाँ  उम्मीद है, वही निराशा भी है. समाज का ताना बाना ऐसा है कि यदि कोई विचार है तो उसका प्रतिवाद भी है. हम सभी इंसान को इन्ही सामाजिक संरचना में जीवन जीना पड़ता है.

आज मानव मंगल, चाँद, समुद्र की गहराई तक पहुंच गया है. यह सब मानव के कड़ी मेहनत से संभव हो पाया है. हम आदिम सामाजिक व्यवस्था से आज उत्तर आधुनिक सामाजिक व्यवस्था में आ गये है. नई सामाजिक व्यवस्था में आज भी एक सोच में परिवर्तन नहीं हुआ है.  वह है भोजन की खोज करना. अतीत काल से आज तक मानव का मुख्य कार्य रहा है, परिवार के लिये भोजन जुटाना. आज जो हम विश्व व्यवस्था देख रहे है,  वह क्रमिक विकास के द्वारा ही संभव हुआ है. आज पुरे संसार में कहीं भी परिवर्तन होता है, उसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है.

प्रश्न है कि परिश्रम होता क्या है —– यह प्रश्न बहुत लोगो को परेशान करता है. मानव द्वारा जो भी शारीरिक या मानसिक कार्य किया जाता है. वह परिश्रम कहलाता है. यह सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी हो सकता है. समाज को बेहतर तरीके से चलाने के लिये व्यवस्था का निर्माण किया गया है.  यदि कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है जो  व्यवस्था को नुकसान पहुँचाता है, इसे ही नकारात्मक कार्य कहते है. जो ऐसा कार्य करता है उसे आसामाजिक तत्व कहते है. अनेक विद्वानों ने परिश्रम को धरती का बरदान कहा है. एक सामान्य मानव अपने परिश्रम के बल पर किसी भी समाज में सम्मान प्राप्त कर सकता है और बेहतर जीवन जी सकता है.

हम सब को भी आपने जीवन में इस तथ्य को समझना चाहिये. जीवन में जो भी हमारे गोल हो उनको प्राप्त कर सके. सारे संसार में गरीबी एक अभिशाप है. एक अनुमान के अनुसार केवल 280करोड़ लोगों को इस धरती पर जीवन जीने की बेहतर सुविधा मिल पा  रही है. शेष सभी लोगों का जीवन संघर्ष मय है. विकासशील देशों की स्थिति और ख़राब है. हम धरती पर कहीं भी हो आपने देश एवं समाज की व्यवस्था के अनुसार रचनात्मक परिश्रम करें. अपने जीवन स्तर को सुधारे.

दोस्तों हम कहाँ पैदा होंगे? यह प्रकृति निश्चित करती है. भावी जीवन को सवारने का अधिकार हमारे पास है.
हम जीवन में जो भी कार्य करे. सफलता मिलने के बाद समाज के लिये रचनात्मक कार्य करें.  आगे चलने एवं सफल होने के दैारान बहुत से संकट आएंगे. इन सभी परेशानियों का हमें सफलता पूर्वक सामना करके आगे बढ़ना होगा.

दोस्तों कमेन्ट और शेयर जरूर करे. थैंक्स.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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