Socialduty

Target of life ———

Target of life —————-मानव का जीवन एक यात्रा है । जीवन में वही सब कुछ हमारे साथ नही होता है ,जैसा हम सोचते है। जीवन को चलाने के लिये ,जीवन की बाह्य परिस्थिति काफी हद तक जिम्मेदार होती है। मानव के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सदा रचनात्मक रूप से कार्य करना होगा। अभी तक ज्ञात जितने भी साक्ष्य हैं उसने मानव के जीवन के लक्ष्य को निश्चित नहीं किया जा सकता है। दुनिया के कोने कोने में मानव अपनी क्षमता और एकता के अनुसार लगातार बेहतर कार्य कर रहा है। एक सामान्य मानव अपने जीवन का लक्ष्य किसी गरिमा मय पद की प्राप्ति को समझता है लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है ।दुनिया में गरीबी के विभिन्न रूप हम देखते हैं। दुनिया के अंदर अमीरी के विभिन्न रूपों को हम देखते हैं। एक तरफ हम देखते हैं कि कुछ देश विकसित है तथा अधिकांश देश गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं ।धरती वही, सूर्य की रोशनी वही ,वर्षा की बूंदे वही , समुद्र का जल भी वही लेकिन फिर भी मानव के विचार और सोच में अंतर पाया जाता है।

जीवन को जाने एक बेहतर रास्ते के लिए———–

मानव कितने ही भौतिक वस्तुओं को अर्जित क्यों ना करें लेकिन यह वस्तुएं मानव को सदा खुश नहीं रख सकते हैं।

यह आधुनिक जीवन शैली में यह साबित हो चुका है ।जीवन में लगातार आगे बढ़ने के लिए हमें सकारात्मक सोच तथा उचित परिस्थितियों का होना परम आवश्यक है ।मानव का जीवन आमतौर पर हम बाह्य परिस्थितियों में देखते हैं ।इससे यह साबित होता है कि मानव का जीवन क्षणभंगुर मात्र है। हम बहुत कुछ अपने ढंग से डिजाइन करने का प्रयास करते हैं ।लेकिन वाह कारक तथा बाहय वातावरण जो हम डिजाइन करते हैं उसके अनुसार नहीं बन पाता है ।जीवन के किसी मोड़ पर आकर हमें अपनी चीजों से सहजता बैठाना ही पड़ता है ।

देश काल परिस्थिति के अनुसार मानव के जीवन का लक्ष्य अलग अलग हो सकता है क्योंकि मानो विभिन्न प्रकार के सामाजिक संरचना में निवास करता है ।मानव के भौतिक लक्ष्य में अंतर हो सकता है लेकिन मानव के आध्यात्मिक लक्ष्य का उद्देश्य समान होता है ।कहा जाता है कि पत्थर विभिन्न प्रकार के ठोकरों को खाकर के छोटा होता है लेकिन एक मानो विभिन्न प्रकार के ठोकरों को खा कर के बड़ा बनता हैजीवन की मूल कहानी भी इसी में छिपी हुई है ।मानव अनेक प्रकार के अपनी महत्वाकांक्षाओं को क्रमिक रूप से पूरा करने का प्रयास करता है यदि व्यक्ति के अंदर महत्वाकांक्षा नहीं होती तो आज की जो विश्व की सामाजिक संरचना हमें दिखाई पड़ती है शायद वैसा रूप हम नहीं देख पाते ।जीवन में बदलाव के लिए लगातार मानव को कोशिश करना पड़ता है।

अभी तक ज्ञात वैज्ञानिक खोजों तथा अन्वेषण के आधार पर यह साबित हो चुका है कि मानव के जीवन का मूल लक्ष्य क्या है । मानव के जीवन का लक्ष्य मानवता की सेवा करना ही है ।परंतु अनेक विचारको के मन में इस मुद्दे को लेकर मतभेद है। एक मानव होने के नाते एक मानव को क्या चाहिए एक मानव से ज्यादा बेहतर और कोई नहीं जान सकता है ।दुनिया में लगातार परिवर्तन की प्रक्रिया चलती रहती है कुछ परिवर्तन सामाजिक स्तर पर होते हैं तो अधिकांश परिवर्तन भौतिक स्तर पर ही होते हैं भौतिक तरीके का होने वाला परिवर्तन लगातार निरंतर स्वयं अपनी प्रक्रिया में होता रहता है । भौतिक परिवर्तन पर मानव का कोई नियंत्रण नहीं रहता है। प्यारे मित्रों जीवन का उद्देश्य क्या है यह बहुत जटिल मुद्दा है और बहुत जटिल विषय है ।एक वाक्य ,एक शब्द में इस मुद्दे को व्याख्या नहीं किया जा सकता है। अगर हम बात करें 1943 के विश्व के मूल संरचना के ,1945 से लेकर के 2020 तक विश्व क्षितिज पर कई परिवर्तन हो चुके हैं कुछ परिवर्तन तो हमें लगातार दिखाई दे रहे हैं लेकिन अनेक ऐसे परिवर्तन है जिसको कि हम देख नहीं सकते हैं।

मानव के जीवन का मूल लक्ष्य अपने जीवन को बेहतर बनाना तथा अपने समाज और देश के लिए रचनात्मक रूप से काम करना ही है। मानव की क्षमता क्या है इसको माननीय आइंस्टीन महोदय ने को साबित कर दिया है। अगर आधुनिक विश्व की हम बात करें तो स्टीफन हाकिन्स ने अपनी सोच तथा अपनी मेहनत से दुनिया को एक नया रास्ता दिखाया है। हम भी यदि जीवन में कुछ बेहतर करना चाहते हैं तो विभिन्न प्रकार के महापुरुषों के जीवन से सीख ले करके अपने जीवन को संवार सकते हैं।

प्यारे मित्रों बहुत-बहुत धन्यवाद पोस्ट को लाइक कमेंट और शेयर जरूर करें धन्यवाद

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
http://www.thesocialduty.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *