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Violence and society.

Violence  and society.

समाज में  हिंसा प्राचीनकाल से पायी जाती  है. आदिम समाज में भोजन के लिये संघर्ष होता था. समय बीतने के साथ हिंसा के स्वरूप में भी परिवर्तन हो गया है. दुनिया के अनेक देशों में सत्ता संघर्ष हो रहा है जिसके मूल में लालच एवं नकारात्मक सोच है. घरेलू हिंसा एक देश की समस्या नहीं है. यह विश्व ब्यापी है. बस इसका स्वरूप हर देश में अलग अलग होता है. भारत में घरेलू हिंसा बहुत ही आम है. पूरे देश में घरेलू हिंसा का रूपरेखा लगभग समान है.

साधारण बात पर अपनी पत्नी को पीटना, भोजन में कमी निकाल कर मारपीट करना, शराब पीकर मारपीट करना, गाली  देना, किसी बड़े के सम्मुख अपमानित करना यह सभी घरेलू हिंसा में आता है. कुछ हमारे भाई केवल अपनी पत्नी को पीटना ही घरेलू हिंसा मानते है जबकि ऐसा नहीं है. आप अपने भाई, बहन, माता पिता, या परिवार के अन्य सदस्य को मारते पीटते है वह भी घरेलू हिंसा में ही आता है.

दोस्तों घरेलू हिंसा एक बहुत ही बड़ी घरेलू परेशानी है. जिससे मानव की गरिमा का बहुत नुकसान हुआ है. इस बिंदु पर सबसे रोचक बात यह है कि यह आदिम समाज में भी  होता रहा है. पुरुष अपने सुबिधा के अनुसार हर चीज चुनता है. यूरोप को छोड़ दे तो पूरी दुनिया में पुरुष प्रधान समाज ही पाया जाता है. यूरोप में स्त्री और पुरुष के बीच काफी समानता आयी है. भारत में देखे तो घरेलू हिंसा में लोग अपनी पत्नी को ही मार डालते है. अपने देश के पुरुषों की सोच में बहुत बड़ा बदलाव लाना होगा. हम सब को आधुनिक सदी के साथ चलना होगा.

सर्वप्रथम हम एक दूसरे का सम्मान करना सीखें. आधुनिक सभ्यता में हिंसा की कोई जगह नहीं है. हम केवल अपने परिवार में ही घरेलू हिंसा को रचनात्मक तरीके से रोकें  तो आज  यह बहुत बड़ा कदम होगा.

जीवन  हिंसा बिहीन नहीं हो सकता है कोशिश करें जीवन में हिंसा कम से कम हो. जीवन एक सुनहरा उपहार है इसे यूँ ही नहीं समाप्त करें. जीवन के कर्तब्य को पूरा करें. यही जीवन का सच है. हम कोशिश करें कि अपने कार्य व्यवहार से किसी को भी नुकसान नहीं पहुँचाये. नारि गरिमा का ख्याल रखें.

यूरोप एवं अमेरिका के धरती पर जो हिंसा  होती है उसका मुख्य कारण मानसिक अलगाव है क्योंकि वहां साधनों की कोई कमी नहीं है. वहां अहंकार के टकराव के कारण अधिकांश झगड़े होते है. अमेरिका में सार्वजनिक जगहों पर होने वाली गोलाबारी इसी का उदाहरण है. यदि बच्चों को भावनात्मक रूप से तैयार किया जाय देश के लिये,  तो गोलाबारी को रोका जा सकता है. बच्चों के अंदर उग्रता का एक कारण यह भी है कि अभिभावक बच्चों को समय नहीं दे पाते है. हम सब  का यह ड्यूटी होना चाहिये कि अपने अपने परिवार को घरेलू हिंसा से मुक्त करें. जीवन में जो विकासवादी हो उसका चुनाव करें. जब भी परिवार में घरेलू हिंसा के अवसर आये उन परिस्थितयों की पहचान करें. हिंसा से बचें. अपने बच्चों को भी घरेलू हिंसा से बचने के रास्ते बताये. उन्हें यह भी बताये कि इससे परिवार एवं समाज का कितना नुकसान होता है.

इस मुद्दे पर दोस्तों मै केवल इतना कहना चाहता हूँ कि जब आप के सामने देश होगा. जब आप के सामने मानव की गरिमा होंगी. तब आप अपने परिवार को भी बेहतर दिशा दे पायेंगे.

दोस्तों कमेन्ट और शेयर जरूर करें. थैंक्स.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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