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What is the real target of life.

What is the real target of life——- जीवन प्रकृति के नियमों पर आधारित होता है. दुनिया के अंदर मानव के जीवन जीने का तरीका भिन्न-भिन्न होता है. दुनिया के सभी मानव अपनी अपनी क्षमता के अनुसार अपने मन एवं देशकाल के अनुसार विशेष लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हैं. संसार के सभी मानव समाज में 95% लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि वह जीवन क्यों जी रहे हैं. बस जीवन की आपाधापी में बढ़े जा रहे हैं, बड़े जा रहे हैं. स्वेट मार्डन ने एक बार कहा था कि जीवन जो आप जी रहे हो, और जो जीवन आप जीना चाहते हो दोनों में समन्नय यानी तालमेल होना बहुत जरूरी है. स्वेट मार्डन ने कहा कि तुम अपने से खुद यह प्रश्न करो कि आप क्यों जी रहे हो? एक बहुत ही सहज विचार है कि यह जीवन जीने के लिए है. मानव होने के नाते हमें यह सत्य विचार जान पड़ता है परंतु मानव का धरती पर आने का कोई ना कोई लक्ष्य तो अवश्य होगा, जो सामान्य मानवी समझ नहीं पाता है.

मानव के जीवन का उद्देश्य——

यह विषय काफी जटिल है. धर्म को जानने वाले व्यक्ति अपने आप को धर्म से जोड़ते हैं. गरीब मानव अपने विकास को धन से जोड़ता है. अमीर मानव अपने जीवन के लक्ष्य को भौतिक विलासिता से जोड़ता है. किसी देश का संविधान अपने देश के सैनिक का लक्ष्य राष्ट्र रक्षा से जोड़ता है. कुछ देश के नागरिक अपने जीवन को राष्ट्र की उन्नति से जोड़ते हैं. पूरे संसार में कोई भी मानव हो वह दुनिया के किसी कोने में पैदा हुआ हो उसके जन्म लेने का तरीका एवं मृत्यु का तरीका एक ही होता है.

यदि दूसरे पक्ष को देखें तो इस दुनिया में सभी मानव के अंदर भूख, प्यास, योन इच्छा, समान रूप से पाई जाती है. यह देश काल एवं परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करता है. ये सभी समाज विशेष के नियम कार्य अवश्य करते हैं पर हमें इस बात का ध्यान देना चाहिए, ये सभी नियम सामान्य मानव द्वारा ही बनाए गए हैं. सकारात्मक सोच एवं ऊर्जा वितरण का सिद्धांत समस्त मानव जगत पर एक साथ लागू होता है. सूर्य की रोशनी और बरसात की बूंदे किसी भी मानव में विभेद नहीं करती हैं.

सत्य का नियम —– दुनिया के किसी देश में चोरी करना अपराध माना जाता है.

दुनिया के किसी देश में घरेलू हिंसा को बेहतर नहीं माना गया है. संसार के किसी भी कोने में किसी की हत्या करना या हत्या करने का प्रयास करना कानून के अनुसार अपराध माना गया है. दोस्तों मानव का जीवन सीधी रेखा में नहीं चलता है जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट एवं संघर्ष को करते हुए जीवन में इंसान को आगे बढ़ना पड़ता है. जीवन कभी भी विलासिता का मोह नहीं रखता है यदि ऐसा होता तो उन लोगों ने क्यों आत्महत्या कर ली थी जिनके पास जीवन का हर ऐसो आराम है. हर प्रकार की सुविधा है भौतिक संसाधन है. पूरे संसार में घटने वाली यह घटना प्रमाणित करती है कि जीवन का मूल लक्ष्य क्या है अभी तक किसी को ज्ञात नहीं है.

जीवन को सकारात्मक ले—-

दोस्तों जीवन को सरल एवं सहज रूप में स्वीकार करें. अपना देश भारत कभी पराधीन था तो उस समय एक सुशिक्षित भारतीय नागरिक का कर्तव्य होता था कि देश को कैसे आजाद कराएं. आज 2020 में अपने देश के हर नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए कि सुंदर जीवन जीते हुए देश के रचनात्मक विकास में योगदान कैसे दें. अफगानिस्तान की आंतरिक हालात सबको पता है एक अफगानी नागरिक का कार्य क्या होना चाहिए जाहिर सी बात है एक सूझबूझ वाले अफगानी नागरिक का कार्य होना चाहिए कि वह अफगान के प्रशासन और वहां की व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में सहायता दे. दोस्तों यह मेरा निजी मत है हमारे तमाम काबिल साथी हमारे विचारों से हो सकता है कि सहमत ना हो. मैं उन दोस्तों से कहना चाहता हूं कि आप अपनी इच्छा के अनुसार अपने मत और जीवन के मूल लक्ष्य को साधे. अक्षर ज्ञान एवं पहाड़ा से शुरुआत करने वाले हम आम भारतीय बच्चे हैं इसी में कोई एम्स में पहुंचता है, और कोई आई आई टी, में पहुंचता है कोई आई आई एम में पहुंचता है, और कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंच जाता है. इस तथ्य से यह चीज पता चलती है कि हम सभी आम भारती जो अपने आप को शिक्षित कहते हैं एक ही बुक पढ़ते हैं एक ही किताब पढ़ते हैं. अब प्रश्न यह उठता है कि क्या हम लोगों के दिमाग के विकास में अंतर होता है प्रकृति द्वारा? नहीं प्रकृति द्वारा कोई अंतर नहीं होता है यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया जा चुका है जिसके विषय में आइंस्टीन ने भी बताया था कि मानव अपनी ब्रेन का केवल 5% ही उपयोग कर पाया है अभी तक?इस तथ्य को यहां पर रखने का मेरा मूल उद्देश्य है प्यारे दोस्तों आप अपने आवश्यकता और सोच तथा संसाधन के अनुसार अपने जीवन के लक्ष्य को साध सकते हैं. यहां पर मैं एक मुद्दे का और जिक्र करना बहुत ही उचित समझता हूं दोस्तों जैसे कि कोई व्यक्ति नेता बनना चाहता है तो उसकी यह सोच होती है कि मैं भारत के संसद का सदस्य बनू और केंद्रीय सरकार में कैबिनेट मंत्री पद प्राप्त करूं. अपने ही देश में राहुल गांधी जैसे लोग जब चाहे तब केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं लेकिन वह नहीं बने क्योंकि वह इस पद को छोटा समझते हैं. मेरे कहने का मतलब है कि हर व्यक्ति का लक्ष्य अलग-अलग होता है यदि कोई व्यक्ति अपना छोटा या बड़ा लक्ष्य निर्धारित करता है, वह उसमे खुश है तो वह उसके लिए सबसे सही है. यह अपना ही देश है कि कोई दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पाता है. यही इस धरती पर मानव के वैचारिक विभिन्नता का सबसे बेहतरीन साक्ष्य है. उम्मीद करते हैं कि दोस्तों यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी आप ईमेल करना चाहते हैं तो पोस्ट के नीचे हमारा फोन नंबर और मेल है आप जरूर मेल करें. देश को बेहतर बनाने में हम सबको मिलजुल कर के आगे बढ़ना होगा दोस्तों कमेंट लाइक और शेयर जरूर करें

धन्यवाद.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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