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Working culture in India.

Working culture in India——इस धरती पर हर मानव को जीवनयापन के लिये कार्य करना पड़ता है. यह धरती मानव के लिये एक कर्मक्षेत्र है. मानव जीवन के अंतिम समय तक कार्य करता रहता है. इंसान के जीवन का लक्ष्य क्या है यह अभी तक ज्ञात नहीं है. यदि हम भारत की बात करें तो यहाँ शारीरिक श्रम को अपमान से जोड़ दिया जाता है. जबकि जीवन में शारीरिक श्रम का बड़ा महत्व है. भारत में जम्मू कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र, तेलंगाना गुजरात से अरुणाचल तक शारीरिक श्रम को सम्मान से जोड़ दिया गया. मेरे विचार से यह गलत है हर मानव को शारीरिक श्रम जरूर करना चाहिये. यदि हम अतीत की बात करें तो भारत की सभ्यता संस्कृति पूरे संसार में सबसे प्राचीन है. भारत में सदैव सकारात्मक विकास को प्रोत्साहन मिला है. दोस्तों मै अपने सभी साथियों से कहना चाहता हूँ कि मेरे ब्लॉग्स का उद्देश्य अपने देश एवं दुनिया के लोगों को बेहतर करने के लिये प्रेरित करना है. मेरे द्वारा उन विचारों को शेयर किया जाना है जो देश एवं दुनिया में लोगों का जीवन आसान बनाये. आज पूरे धरती पर कई लोगों के पास बहुत भौतिक संसाधन है पर वे खुश नहीं है. इन लोगों के जीवन में खुशियाँ कैसे लायी जाय यही मेरे शोध का विषय है. सारे संसार में संघर्ष हो रहा है, कहीं तेल को लेकर, कहीं हथियार को लेकर, कहीं कब्जे को लेकर, कहीं धर्म को लेकर. एक सामान्य मानव क्या करें? मेरे विचार से साहस रखें. अपने देश की परम्परा और कानून को जाने. देश के विकास के लिये हमेशा तैयार रहे. गरीबी भगवान या अल्लाह की देन नहीं है. मुद्रा के विकास के साथ साथ विभिन्न व्यवस्था का जन्म हुआ. जिससे मानव का जीवन आसान हुआ. हम सभी भारतवासियों को उस अंधविश्वास और परम्परा को दूर करने का प्रयास करना चाहिये जो मानव के विकास में परेशानी पैदा करें. हमें ऐसे किसी नियम को नहीं मानना चाहिये जो विकृति पैदा करें.. अपने देश में सभी धर्मो के लोग मिलकर साझा मूल्यों को अपना कर जीवन जीते है. आने वाले सालों में हम सब को देश की प्रगति में योगदान देना है. हम वह सब कुछ करें जो देश को, समाज को मजबूती प्रदान करें. हम सब को अपना नजरिया बदलना होगा. देश के हर नागरिक को जात पात एवं धर्म से ऊपर उठकर देश हित में सोचना भी होगा और कार्य भी करना होगा.

135करोड़ की आबादी का देश दुनिया के लिये एक रोल मॉडल बन सकता है. वैसे भी आध्यात्मिक सिद्धांतो के स्तर पर भारत बहुत ही शक्ति शाली देश है. आधुनिक संसार में भारत को दुनिया के साथ चलना होगा. यदि दुनिया के किसी भी कोने में बेहतर चीजें मिले जिससे अपने देश एवं समाज का भला हो सकता है उसको स्वीकार करने में देर नहीं करना चाहिये. भारत की बहुत बड़ी आबादी गरीबी में जीती है. गरीबी अभिशाप नहीं है. अपनी गरीबी को दूर करने का प्रयास नहीं करना ही अभिशाप है. दुनिया का कोई भी देश हो भय, भूख से, लड़ना बहादुरी की बात होती है.

लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी देशसेवा है. आज उत्तर आधुनिक समाज में समस्त संसार एक गाँव के रूप में हो गया है. दुनिया के किसी भी कोने में घटने वाली घटना दुनिया के लगभग हर देश में प्रभाव डालती है. आज यदि हम तकनीक का सही उपयोग करें तो खुद की और अपने देश की गरीबी को दूर कर सकते है.

संयुक्त राष्ट्र संघ ने गरीबी को मानव मात्र के लिये अभिशाप माना है. यदि हम व्यवहारिक तथ्य पर सोचें एक मानव के रूप में वह हम सब कुछ करें जो मानव की गरिमा इजाजत देती है. हम ऐसा कुछ भी नहीं करें जिससे मानव मात्र को नुकसान हो. मेरे विचार से यह एक बहुत बेहतरीन विकल्प हो सकता है अपने देश की गरिमा को प्रमाणित करने का. पिछले ओलम्पिक में जापान की टीम हार गयी थी इसके बाद जापानी खिलाड़ियों ने जहाँ उन्हें बैठने को स्थान दिया गया था, सभी खिलाड़ी ने उस स्थान की साफ सफाई की.

यह वह सोच है जिससे अपने देश के कार्य संस्कृति को सुधारा जा सकता है. दोस्तों कमेन्ट और लाइक, शेयर जरूर करें. धन्यवाद.

Adesh Kumar Singh
Adesh Kumar Singh
I am adesh kumar singh, my education post graduate in sociology. My life target? What is the gole of life. My blogs www. thesocialduty.Com, my research only social issu, My phone nu mber-9795205824,my email-adeshkumarsingh93@gmail. com
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